Saat Pariyon Ki Kahani Hindi: 7 जादुई परियों की कहानी
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Saat Pariyon Ki Kahani Hindi : बहुत समय पहले की बात है एक गाँव था उस गांव का नाम गुटिँदा था उस गाँव में रमेश नाम का एक लकडहारा रहता था.
वह आस-पास के जंगलो से लकड़ी काटता और और शहर जाकर उन लकड़ियों को बेच आता था, इसी तरह वह अपना और अपने परिवार का जीवन व्यापन करता था
परन्तु कुछ समय बाद सभी जंगलो को वह के ठेकेदार ने खरीद लिया जिसके कारण रमेश वहाँ से लकड़ी काट कर नहीं ला सकता था, और उसके पास कोई दूसरा काम भी नहीं था जिसे वो कर सके इसलिए वो परेशान रहने लगा
काम ना मिलने के कारण अब उसके पास घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था, उसका परिवार भोजन न होने के कारण भूखों मरने लगा था, इसलिए कई बार उसके परिवार के सदस्य भूखे भी सो जाते थे
जिससे रमेश और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहने लगे थे, ना तो उनके पास कोई काम था ना ही खाने को घर में भोजन था इसलिए रमेश की पत्नी ने रमेश से कहा- सुनिए अगर हम रोजाना इस प्रकार भूखे रहेंगे तो भूख से ही मर जायेंगे, इसलिए तुम कोई दूसरा काम ही कर लो
तब रमेश ने अपनी पत्नी से कहा की में भी कुछ काम करके कमाना चाहता हूँ, लेकिन अब इस गांव में कोई काम नहीं रहा जिसे कर के हमें पेट भर खाना मिल सके
मैंने गांव में ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी जहाँ मैंने काम नहीं तलाशा पर अब मैं काम तलाश करके बहुत थक चूका हूँ
Saat Pariyon Ki Kahani Hindi
रमेश की पत्नी ने रमेश से कहा, ”क्यूँ ना तुम शहर जाकर ही कोई दूसरा काम कर लो जिससे काम के बदले धन व पेट भर भोजन भी मिलेगा
रमेश ने अपनी पत्नी की बात मान कर शहर जाने को तैयार हो गया.
अगले दिन रमेश की पत्नी ने रमेश को 7 रोटियां नमक मिर्च लगाकर रमेश को दे दीं, और रमेश से कहा
मैंने ये 7 रोटियां बनाई हैं जो तुम्हे 7 दिनों तक खाना हैं, तुम एक रोटी रोज खाना क्योकि तुम्हे शहर पहुँचने में कम से कम 3 दिन लग जायेंगे, और बाकी के 4 दिनों में तुम्हे काम जरूर ही मिल जाएगा
तुम शहर में खूब मन लगाकर मेहनत करना और पैसे कमाना मैं यहाँ घर का पूरा ध्यान रखूंगी
और रमेश ने भी खुश होकर कहा मैं वह खूब मेहनत करूंगा और खूब सारा पैसा कमाऊंगा यह कहकर रमेश शहर की ओर काम की तलाश में निकल पड़ा
कुछ दूर जाकर रमेश को एक जंगल से गुजरना था पर जंगल बहुत घना था इसलिए रमेश को जंगल से निकलते-निकलते शाम हो गयी, रात होने आ गयी थी और वह काफी थक भी चुका था इसलिए उसने सोचा क्यों ना मैं आराम कर लू इसलिए वह एक बड़े वट वृक्ष के निचे बैठ गया
कुछ समय आराम करने के बाद रमेश को भूख लगने लगी थी उसने अपनी रोटियों की पोटली खोली और कहा- रोटियां तो सात ही हैं मैं इसमें से एक खाऊं या दो खाऊं या तीन खाऊं या सातों रोटियों को ही खा जाऊं वह ये सब बातें अपने आप से ही कह रहा था
रमेश जिस पेड के निचे बैठकर आराम कर रहा था, उसी पेड पर सात परियां बैठीं थीं, जब उन परियों ने रमेश की सारी बातें सुनीं तो परियां सोचने लगीं की शायद इस मनुष्य को हमारे बारे में पता चल चूका है, और यह हमें जिन्दा ही खाना चाहता है
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वे सातों परियां बहुत डर चुकी थीं और पेड से नीचे उतरकर रमेश के सामने आकर खड़ी हो गयीं
रमेश ने जब अपने सामने उन 7 सुन्दर परियों को खड़े देखा तो आश्चर्य चकित रह गया और मन ही मन सोचने लगा की इस घने जंगल में इतनी खूबसूरत परियां कहाँ से आयीं है और मुझसे क्या चाहतीं हैं
वे परियां बहुत ही सुन्दर थीं इसलिए रमेश बिना पलक झपकाए एक टक उन्हें लगातार देखे जा रहा था, उसकी नजर परियों से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी
फिर रमेश ने कैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर बहुत विनम्र भाव से उन परियों से कहा- तुम सब कौन हो? और इस सुनसान वीराने जंगल में इस पेड़ पर क्या कर रही हो
तो रमेश के इस प्रश्न का जवाब देने के लिए उन सातों परियों में से पहली परी बोली – हे मनुष्य ! हम सब परी लोक की सुन्दर परियां हैं परन्तु वहां हमने कुछ गलतियां की थी जिसकी सजा हमें धरती लोक पर 27 दिनों तक काटनी हैं
आज हमारा धरती लोक पर पहला ही दिन है इसलिए दिन भर तो हम यहाँ वहाँ इधर उधर घुमती रही और रात में आराम करने के लिए इस पेड पर आकर बैठी हैं
उसके बाद फिर दूसरी परी बोली – ”हे मानव ! अब तुम बताओ इस जंगल में इतनी रात क्या कर रहे हो, और हमें क्यूँ खाना चाहते हो?
अगर तुम हमें छोड़ देते हो तो हम सब तुम्हारी मदद करेंगी, पहले तो रमेश को कुछ भी समझ नहीं आया, परन्तु बाद में उसने पूरी बात भांप ली, और वह अपनी सारी बात उन परियों को बताने लगा
उसने परियों को पूरी बात बताई उसने परियों को बताया की वह वहुत गरीब है, इसी कारण उसका परिवार भोजन के बिना भूख से तड़प रहा है
अब वह नए काम की तलाश में व बहुत पैसा कमाने के लिए शहर जा रहा है, रमेश की दुखभरी कहानी सुनकर परियां भी बहुत दुखी हुई तब उनमें से एक परी ने उसको पीतल की जादुई पतीली दी और रमेश से कहा की तुम इस पतीली को अपने घर ले जाओ
Saat Pariyon Ki Kahani Hindi
और कहा जब भी तुम्हें भूख लगे तभी चूल्हे पर इस पतीली को चढ़ा देना, और जो
भी भोजन चाहिए वही पतीली से कह देना वही भोजन इस पतीली में बन जाएगा, अब तुम्हारा परिवार भूख के मारे नहीं मरेगा
रमेश को उन परियों की बातें आश्चर्यजनक लगीं, और उन परियों की बातो पर विश्वाश करके वह उस पतीली को लेकर अपने घर की ओर चल दिया, उसके जाने के पश्चात् सभी परियां पेड पर वापस बैठ गयीं
रमेश सोच रहा था क्या ऐसा भी हो सकता है? क्या यह पतीली हमें हर रोज पेट भर भोजन देगी? क्या सच में यह जादुई पतीली है?
उसकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था रमेश को घर लौटते समय रात हो गयी, अचानक कही दूर एक झोंपड़ी पर उसकी नजर पड़ी उसने सोचा क्यों ना रात में इसी झोंपड़ी में शरण ले लू और वह उस झोंपड़ी के पास जाने लगा
वहाँ जाकर उसने उस झोंपड़ी में रहने वाले आदमी से झोपड़ी में रुकने की इजाजत मांगी, तो उसने रमेश को अपनी झोंपड़ी में रहने के लिए बुला लिया और रात निकालने के लिए झोंपड़ी में सोने की हामी भर दी
रमेश के हाथ में पतीली देखकर उस आदमी ने रमेश से उस पतीली के बारे में पूंछने लगा तब रमेश ने अपने सीधे स्वभाव से उस पतीली से जुडी पूरी कहानी बयां कर दी
और इस आदमी से कहने लगा की ये जादुई पतीली है, रमेश की बात सुनकर उस आदमी के मन में लालच आ गया और वह सोचने लगा यदि मैं इस पतीली को चुरा लू तो मेरी सारी जिंदगी आराम से निकल जाएगी
जब रमेश सो गया तो इस आदमीं ने उस पतीली जगह उसके जैसी एक पतीली लाकर रख दी और वह जादुई पतीली चुरा ली
जब सुबह हुई तो रमेश अपनी पतीली लेकर घर पहुंचा और वह बहुत खुश भी था क्योंकि उसकी समस्या का निदान हो गया था, जब रमेश की पत्नी ने रमेश को घर में देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ
और उसने सोचा मैंने तो इन्हें शहर जाकर काम करने और पैसे कमाने के लिए कहा था, और भोजन के लिए 7 दिन के लिए सात रोटियां भी दी थीं लेकिन ये तो दुसरे दिन ही वापस आ गए
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रमेश की पत्नी ने रमेश से पूंछा, मैंने तो सात दिनों के लिए सात रोटियां बनाकर दीं थीं और तुमने दो दिन में ही खा डाली, तो रमेश ने अपनी पत्नी को शांत करते हुए उन परियों से मिलने वाली उस पीतल की पतीली के बारे में बताया
उसने अपनी पत्नी से कहा तुम चूल्हे पर इस पतीली को पानी से भरकर चढा दो उसकी पत्नी ने वैसा ही किया
बहुत देर तक पतीली में पानी उबलता रहा पानी उबालकर ख़तम हो रहा था, परन्तु कुछ भी नहीं बन रहा था रमेश की पत्नी बोली, ”पानी बहुत देर से पक रहा हैं कुछ भी नहीं बना इसलिए पतीली निचे उतार लूं ? रमेश ने अपने पत्नी से कहा, ”तुम ठीक कहती हो अब पतीली को चूल्हे से निचे उतार दो
जब रमेश ने पतीली में झांक कर देखा तो उसमें कुछ भी नहीं था ये सब देखकर रमेश बहुत दुखी हुआ
अगले दिन रमेश की पत्नी ने रमेश को कहा की अब किसी के बहकावे में मत आना, तो रमेश ने कहा तुम ठीक कह रही हो मैं शहर जाकर खूब मेहनत से काम करूँगा और शहर जाने के लिए घर से निकल पड़ा
जाते जाते वह जंगल में पहुँचकर उसी वृक्ष की निचे बैठ गया, धीरे धीरे अँधेरा होने लगा था रमेश सोच रहा था की उन परियों ने मुझसे झूठ बोलकर धोखा दिया है, इसलिए वह दुखी होने के साथ-साथ बहुत गुस्से में भी था
वह रोटियों की पोटली खोलकर उसी प्रकार कहने लगा एक खाऊं या दो खाऊं या तीन खाऊं या सातों रोटियों को ही खा जाऊं
Saat Pariyon Ki Kahani Hindi
परियों ने रमेश की पूरी बात सुनी और पेड से निचे उतरीं रमेश के पास जाकर बोली हमने तुम्हें एक जादुई पतीली दी थी उसका क्या किया तुमने ? तब रमेश गुस्से से बोला तुमने झूठ बोलकर धोखा दिया था वह कोई जादुई पतीली नहीं थी, वह तो एक सामान्य पतीली ही थी
रमेश की बात सुनकर, परियों को बहुत आश्चर्य हुआ, इस बार परियों ने रमेश को जादुई चक्की दी और कहा तुम इस चक्की को ले जाओ तथा इस चक्की की ये खास बात है की इसमें बिना गेहूं डाले ही तुम इससे जितना चाहें उतना आटा निकाल सकते हो
क्योंकि यह जादुई चक्की है जब भी तुम्हे भूख लगे तुम इस चक्की को ये बोल देना की "हे जादुई चक्की मुझे पेट भर आटा दो" जैसे ही तुम ये बोलोगे इस चक्की से बिना गेहूं डाले ही आटा निकलने लगेगा
रमेश फिर से खुश हो गया और प्रसन्ता से वह चक्की लेकर घर की तरफ चल दिया, लेकिन इस बार भी उसे लौटते समय रात हो गई, और उसने फिर से उसी झोंपड़ी में शरण लेने की ठानी
उस आदमीं ने इस बार रमेश की खूब खातिरदारी की उसे अच्छा भोजन भी खिलाया रमेश के हाथ में चक्की देखकर उसके बारे में पूछने लगा तो फिर से रमेश ने उनको उस जादुई चक्की की विशेषता बता दी
रमेश बहुत सीधा आदमीं था उसे क्या मालूम था की ये आदमीं बहुत धूर्त व लोभी था, उसने चक्की को रखा और सो गया
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अबकी बार भी उस आदमी ने रमेश की चक्की की जगह दूसरी चक्की बदल दी जैसे ही सुबह हुई रमेश चक्की लेकर अपने घर पंहुचा रमेश की पत्नी रमेश को देखते ही क्रोध में लाल पिली हो गयी और बोली तुम फिर से वापस आ गये? मुझे ऐसा लगता है की तुम कोई काम करना चाहते ही नहीं थे
रमेश ने अपनी पत्नी को शांत किया और कहा, चक्की को रखो और इसे ये शब्द बोल दो "हे जादुई चक्की मुझे पेट भर आटा दो" ये हमें पिसा हुआ आता देगी
तो उसकी पत्नी ने ऐसा ही किया पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, रमेश फिर से बहुत गुस्सा हुआ उसके समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या करे
रमेश ने फिर से शहर जाने ठानी और अपनी वही सात रोटियां लेकर शहर की तरफ चल दिया, रास्ते में शाम होते-होते वह उसी जंगल में उसी पेड के निचे आकर बैठ गया
और गुस्से से वही बात दोहराई जिसे सुनकर फिर से परियां उस पेड से निचे उतर आयीं, और रमेश से कहने लगीं, तुम फिर से आ गए ? अब क्या हुआ?
परिया बोली तुम बार-बार हमें क्यों परेशान कर रहे हो, रमेश बोला, ”तुमने मुझे दूसरी बार धोखा दिया है , इस बात से आश्चर्यचकित परियां कहने लगीं हमनें तुम्हारे साथ कोई धोखा नहीं किया है, हमने तुम्हे वास्तव में एक जादुई चक्की ही दी थी
लेकिन रमेश ने उनकी बात नहीं मानी, और परियां कहने लगीं अबकी बार हम तुम्हें एक घडा देंगे, इस घड़े को कहना हे! जादुई घड़े तुम सोना, चाँदी, हीरे मोतियों से भर जाओ, तो यह घडा अपने आप सोना, चाँदी, हीरे मोतियों से भर जाएगा
Saat Pariyon Ki Kahani Hindi
रमेश ने अंतिम बार परियो की बात मानी और अपने घर की तरफ चल दिया और रास्ते में उसी झोंपड़ी में रात बिताई और अबकी बार भी रमेश ने उस आदमी को उस जादुई घड़े के बारे में सबकुछ बता दिया
इस आदमी ने फिर से चालाकी की और पहले की भांति अबकी बार उसका घड़ा बदल दिया, जैसे ही सुबह हुई रमेश उस घड़े को लेकर अपने घर पहुंचा तो उसकी पत्नी उस पर आगबबुला हो गयी, और कहने लगी की मुझे पहले ही पता था तुम काम ही नहीं करना चाहते थे मुझे तो लगता है भूख से ही मरना लिखा है
रमेश ने पत्नी के गुस्से को शांत किया और उसकी विशेषता बताई, तब पत्नी शांत हुई परियों के कहे अनुसार सब किया लेकिन इस बार भी कोई लाभ नहीं हुआ
अब रमेश को बहुत ग़ुस्सा आ गया था वो बिना बोले फिर से जंगल में गया और उसी पेड़ के निचे जाकर परियो को जोर जोर से बोलने लगा अब मै तुम्हे खाऊंगा तुमने मुझे धोखा दिया है यह सब सुनकर उन ७ परियो में से
एक परी ने पेड़ से उतरकर रमेश से पूंछा तुम हमें क्यों खाना चाहते हो तो रमेश ने कहा तुमने मुझे धोखा दिया है तुमने मुझे अपने जादुई उपहार मुझे देकर पागल बनाया है तो उस परी ने कहा नहीं नहीं अवश्य ही तुम्हारे साथ किसी ने धोखा किया है
तुम मुझे पहले ये बताओ की यहाँ से जाने के बाद तुम कही रुकते थोड़े हो ? तो रमेश ने कहा घर जाते समय मुझे रास्ते में ही रात हो जाती है जिसके कारण मुझे एक झोपड़ी में रुकना पड़ता है
इस पर परी ने पुरे माजरे को भांप लिया और बोली अबकी बार मै तुम्हे एक रस्सी और डंडा दूंगी तुम बस उसे यह बोलना की जिस किसी ने मेरा सामान चोरी किया है उसकी पिटाई करो मेरे जादुई उपहार मुझे वापस लौटा दे
Pariyon ki kahani hindi mai
इसके बाद रमेश अपने घर को निकल गया और रास्ते में उसी झोपडी में रुका जिसमे पहले दो बार रुका था अबकी बार भी उस आदमीं ने रमेश की खूब खातिरदारी की और रमेश से पूछा की अबकी बार भी कुछ लाये हो, तो रमेश ने कहा हां रमेश ने अपने जेब से उस रस्सी और डंडे को निकल कर कहा परी के बताये अनुसार कहा 'जिस किसी ने मेरा सामान चोरी किया है उसकी पिटाई करो मेरे जादुई उपहार मुझे वापस लौटा दे'
इतना बोलते ही रस्सी और डंडे ने अपना काम शुरू कर दिया रस्सी और डंडे ने उस आदमी को बाँधा और डंडे से जब तक पीटा तब तक उसने उसके जादुई उपहार चोरना कबूल नहीं किया और उसको पिट पिटकर उसको अधमरा कर दिया रमेश ने अपने जादुई उपहारों को लेकर घर की ओर प्रस्थान किया और घर पर अपने परिवार को इन उपहारों से चमकृत किया
Saat Pariyon Ki Kahani Hindi Moral: हमें कभी भी किसी के साथ विश्वश्घात नहीं करना चाहिए और जो मनुष्य दूसरों को धोखा देता है उसको ईश्वर अवश्य सजा देता है

