बुधवार, 27 मई 2020

Saat Pariyon Ki Kahani Hindi - 7 जादुई परियों की कहानी

Saat Pariyon Ki Kahani Hindi: 7 जादुई परियों की कहानी


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Saat Pariyon Ki Kahani Hindi : बहुत समय पहले की  बात है एक गाँव था उस गांव का नाम गुटिँदा था उस गाँव में रमेश नाम का एक लकडहारा रहता था.

वह आस-पास के जंगलो से लकड़ी काटता और और शहर जाकर उन लकड़ियों को बेच आता था, इसी तरह  वह अपना और अपने परिवार का जीवन व्यापन करता था



परन्तु कुछ समय बाद सभी जंगलो को वह के ठेकेदार ने खरीद लिया जिसके कारण रमेश वहाँ से  लकड़ी काट कर नहीं ला सकता था, और उसके पास कोई दूसरा काम भी नहीं था जिसे वो कर सके इसलिए वो परेशान रहने लगा



काम ना मिलने के कारण अब उसके पास घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था, उसका परिवार भोजन न होने के कारण भूखों मरने लगा था, इसलिए कई बार उसके परिवार के सदस्य भूखे भी सो जाते थे



जिससे  रमेश और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहने लगे थे, ना तो उनके पास कोई काम था ना ही खाने को घर में भोजन था इसलिए रमेश की पत्नी ने रमेश से कहा- सुनिए अगर हम रोजाना इस प्रकार भूखे रहेंगे तो भूख से ही मर जायेंगे, इसलिए तुम कोई दूसरा काम ही कर लो



तब रमेश ने अपनी पत्नी से कहा की में भी कुछ काम करके कमाना चाहता हूँ, लेकिन अब इस गांव में कोई काम नहीं रहा  जिसे कर के हमें पेट भर खाना मिल सके


मैंने गांव में ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी जहाँ मैंने काम नहीं तलाशा पर अब मैं काम तलाश करके बहुत थक चूका हूँ


Saat Pariyon Ki Kahani Hindi


रमेश की पत्नी ने रमेश से कहा, ”क्यूँ ना तुम शहर जाकर ही कोई दूसरा काम कर लो जिससे काम के बदले धन व पेट भर भोजन भी मिलेगा



रमेश ने अपनी पत्नी की बात मान कर शहर जाने को तैयार हो गया.



अगले दिन रमेश की पत्नी ने रमेश को 7 रोटियां नमक मिर्च लगाकर रमेश को दे दीं, और रमेश से कहा
मैंने ये 7 रोटियां बनाई हैं जो तुम्हे 7 दिनों तक खाना हैं, तुम एक रोटी रोज खाना  क्योकि तुम्हे शहर पहुँचने में कम से कम 3 दिन लग जायेंगे, और बाकी के 4 दिनों में तुम्हे काम जरूर ही मिल जाएगा


तुम शहर में खूब मन लगाकर मेहनत करना और पैसे कमाना मैं यहाँ घर का पूरा ध्यान रखूंगी


और रमेश ने भी खुश होकर कहा मैं वह  खूब मेहनत करूंगा और खूब सारा पैसा कमाऊंगा यह कहकर रमेश शहर की ओर काम की तलाश में निकल पड़ा


कुछ दूर जाकर रमेश को एक जंगल से गुजरना था पर जंगल बहुत घना था इसलिए  रमेश को जंगल से निकलते-निकलते शाम हो गयी, रात होने आ गयी थी और वह काफी थक भी चुका था इसलिए उसने सोचा क्यों ना मैं आराम कर लू इसलिए वह एक बड़े वट वृक्ष के निचे बैठ गया


कुछ समय आराम करने के बाद रमेश को भूख लगने लगी थी उसने अपनी रोटियों की पोटली खोली और कहा- रोटियां तो सात ही हैं मैं इसमें से एक खाऊं या दो खाऊं या तीन खाऊं या सातों रोटियों को ही खा जाऊं वह ये सब बातें अपने आप से ही कह रहा था



रमेश जिस पेड के निचे बैठकर आराम कर रहा था, उसी पेड पर सात परियां बैठीं थीं, जब उन परियों ने रमेश की सारी बातें सुनीं तो परियां सोचने लगीं की शायद इस मनुष्य को हमारे बारे में पता चल चूका है, और यह हमें जिन्दा ही खाना चाहता है


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वे सातों परियां बहुत डर चुकी थीं और पेड से नीचे उतरकर रमेश के सामने आकर खड़ी हो गयीं


रमेश ने जब अपने सामने उन 7 सुन्दर परियों को खड़े देखा तो आश्चर्य चकित  रह गया और मन ही मन सोचने लगा की इस घने जंगल में इतनी खूबसूरत परियां कहाँ से आयीं है और मुझसे क्या चाहतीं हैं


वे परियां बहुत ही सुन्दर थीं इसलिए रमेश बिना पलक झपकाए  एक टक उन्हें लगातार देखे जा रहा था, उसकी नजर परियों से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी


फिर रमेश  ने कैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर बहुत विनम्र भाव से उन परियों से कहा- तुम सब कौन हो? और इस सुनसान वीराने जंगल में इस पेड़ पर क्या कर रही हो


तो रमेश के इस प्रश्न का जवाब देने के लिए उन सातों परियों में से पहली परी बोली – हे मनुष्य ! हम सब परी लोक की सुन्दर परियां हैं परन्तु वहां हमने कुछ गलतियां की थी जिसकी सजा हमें धरती लोक पर 27 दिनों तक काटनी हैं


आज हमारा धरती लोक पर पहला ही दिन है इसलिए  दिन भर तो हम यहाँ वहाँ इधर उधर घुमती रही और रात में आराम करने के लिए इस पेड पर आकर बैठी हैं


उसके बाद फिर दूसरी परी बोली – ”हे मानव ! अब तुम बताओ इस जंगल में इतनी रात क्या कर रहे हो, और हमें क्यूँ खाना चाहते हो?


अगर तुम हमें छोड़ देते हो तो हम सब तुम्हारी मदद करेंगी, पहले तो रमेश को कुछ भी समझ नहीं आया, परन्तु बाद में उसने पूरी बात भांप ली, और वह अपनी सारी बात उन परियों को बताने लगा


उसने परियों को पूरी बात बताई उसने परियों को बताया की वह वहुत गरीब है, इसी कारण उसका परिवार भोजन के बिना भूख से तड़प रहा है


अब वह नए काम की तलाश में व बहुत पैसा कमाने के लिए शहर जा रहा है, रमेश  की दुखभरी कहानी सुनकर परियां भी बहुत दुखी हुई तब उनमें से एक परी ने उसको पीतल की जादुई पतीली दी और रमेश से कहा की तुम इस पतीली को अपने घर ले जाओ


Saat Pariyon Ki Kahani Hindi


और कहा जब भी तुम्हें भूख लगे तभी चूल्हे पर इस पतीली को चढ़ा देना, और जो
 भी भोजन चाहिए वही पतीली से कह देना वही भोजन इस पतीली में बन जाएगा, अब तुम्हारा परिवार भूख के मारे नहीं मरेगा


रमेश को उन परियों की बातें आश्चर्यजनक लगीं, और उन परियों की बातो पर विश्वाश करके वह उस पतीली को लेकर अपने घर की ओर चल दिया, उसके जाने के पश्चात् सभी परियां पेड पर वापस बैठ गयीं


रमेश सोच रहा था क्या ऐसा भी हो सकता है? क्या यह पतीली हमें हर रोज पेट भर भोजन देगी? क्या सच में यह जादुई पतीली है?


उसकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था रमेश को घर लौटते समय रात हो गयी, अचानक कही दूर एक झोंपड़ी पर उसकी नजर पड़ी उसने सोचा क्यों ना रात में इसी झोंपड़ी में शरण ले लू और वह उस झोंपड़ी के पास जाने लगा


 वहाँ जाकर उसने उस झोंपड़ी में रहने वाले आदमी से झोपड़ी में रुकने की इजाजत मांगी, तो उसने रमेश को अपनी झोंपड़ी में रहने के लिए बुला लिया और रात निकालने के लिए झोंपड़ी में सोने की हामी भर दी


रमेश के हाथ में पतीली देखकर उस आदमी ने रमेश से उस पतीली के बारे में पूंछने लगा तब रमेश ने अपने सीधे स्वभाव से उस पतीली से जुडी पूरी कहानी बयां कर दी


और इस आदमी से कहने लगा की ये जादुई पतीली है, रमेश की बात सुनकर उस आदमी के मन में लालच आ गया और वह सोचने लगा यदि मैं इस पतीली को चुरा लू तो मेरी सारी जिंदगी आराम से निकल जाएगी


जब रमेश सो गया तो इस आदमीं ने उस पतीली जगह उसके जैसी एक पतीली लाकर रख दी और वह जादुई पतीली चुरा ली


जब सुबह हुई तो रमेश अपनी पतीली लेकर घर पहुंचा और वह बहुत खुश भी था क्योंकि उसकी समस्या का निदान हो गया था, जब रमेश की पत्नी ने रमेश को घर में  देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ


और उसने सोचा मैंने तो इन्हें शहर जाकर काम करने और पैसे कमाने के लिए कहा था, और भोजन के लिए 7 दिन के लिए सात रोटियां भी दी थीं लेकिन ये तो दुसरे दिन ही वापस आ गए


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रमेश की पत्नी ने रमेश से पूंछा, मैंने तो सात दिनों के लिए सात रोटियां बनाकर दीं थीं और तुमने दो दिन में ही खा डाली, तो रमेश ने अपनी पत्नी को शांत करते हुए उन  परियों से मिलने वाली उस पीतल की पतीली के बारे में बताया


उसने अपनी पत्नी से कहा तुम चूल्हे पर इस पतीली को पानी से भरकर चढा दो उसकी पत्नी ने वैसा ही किया


बहुत देर तक पतीली में पानी उबलता रहा पानी उबालकर ख़तम हो रहा था, परन्तु कुछ भी नहीं बन रहा था रमेश की पत्नी बोली, ”पानी बहुत देर से पक रहा हैं कुछ भी नहीं बना इसलिए पतीली निचे उतार लूं ? रमेश ने अपने पत्नी से कहा, ”तुम ठीक कहती हो अब पतीली को चूल्हे से निचे उतार दो


जब रमेश ने पतीली में झांक कर देखा तो उसमें कुछ भी नहीं था ये सब देखकर रमेश  बहुत दुखी हुआ



अगले दिन रमेश की पत्नी ने रमेश को कहा की अब किसी के बहकावे में मत आना, तो रमेश ने कहा तुम ठीक कह रही हो मैं शहर जाकर खूब मेहनत से काम करूँगा और शहर जाने के लिए घर से निकल पड़ा


जाते जाते वह जंगल में पहुँचकर उसी वृक्ष की निचे बैठ गया, धीरे धीरे अँधेरा होने लगा था रमेश सोच रहा था की उन परियों ने मुझसे झूठ बोलकर धोखा दिया है, इसलिए वह दुखी होने के साथ-साथ बहुत गुस्से में भी था


वह रोटियों की पोटली खोलकर उसी प्रकार कहने लगा एक खाऊं या दो खाऊं या तीन खाऊं या सातों रोटियों को ही खा जाऊं


Saat Pariyon Ki Kahani Hindi


परियों ने रमेश की पूरी बात सुनी और पेड से निचे उतरीं रमेश के पास जाकर बोली  हमने तुम्हें एक जादुई पतीली दी थी उसका क्या किया तुमने ? तब रमेश गुस्से से बोला तुमने झूठ बोलकर धोखा दिया था  वह कोई जादुई पतीली नहीं थी, वह तो एक सामान्य पतीली ही थी


रमेश  की बात सुनकर, परियों को बहुत आश्चर्य हुआ, इस बार परियों ने रमेश को जादुई चक्की दी और कहा तुम इस चक्की को ले जाओ तथा इस चक्की की ये खास बात है की इसमें बिना गेहूं डाले ही तुम इससे जितना चाहें उतना आटा निकाल सकते हो



क्योंकि यह जादुई चक्की है जब भी तुम्हे भूख लगे तुम इस चक्की को ये बोल देना  की "हे जादुई चक्की मुझे पेट भर आटा दो" जैसे ही तुम ये बोलोगे इस चक्की से बिना गेहूं डाले ही आटा निकलने लगेगा


रमेश फिर से खुश हो गया और  प्रसन्ता से वह चक्की लेकर घर की तरफ चल दिया, लेकिन इस बार  भी उसे लौटते समय रात हो गई, और उसने फिर से उसी झोंपड़ी में शरण लेने की ठानी


उस आदमीं ने इस बार रमेश की खूब खातिरदारी की उसे अच्छा भोजन भी खिलाया रमेश के हाथ में चक्की देखकर उसके बारे में पूछने लगा तो फिर से रमेश ने उनको उस जादुई चक्की की विशेषता बता दी


रमेश  बहुत सीधा आदमीं था उसे क्या मालूम था की ये आदमीं बहुत धूर्त व लोभी था, उसने चक्की को रखा और सो गया


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अबकी बार भी उस आदमी ने रमेश की चक्की की जगह दूसरी चक्की बदल दी जैसे ही सुबह हुई रमेश चक्की लेकर अपने घर पंहुचा  रमेश की पत्नी रमेश को देखते ही क्रोध में लाल पिली हो गयी और बोली तुम फिर से वापस आ गये? मुझे ऐसा लगता है की तुम कोई काम करना चाहते ही नहीं थे


रमेश  ने अपनी पत्नी को शांत किया और कहा, चक्की को रखो और इसे ये शब्द बोल दो "हे जादुई चक्की मुझे पेट भर आटा दो" ये हमें पिसा हुआ आता देगी


तो उसकी पत्नी ने ऐसा ही किया पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, रमेश फिर से बहुत गुस्सा  हुआ उसके समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या करे


रमेश ने फिर से शहर जाने ठानी और अपनी वही सात रोटियां लेकर शहर की तरफ चल दिया, रास्ते में शाम होते-होते वह उसी जंगल में उसी पेड के निचे आकर बैठ गया


और गुस्से से वही बात दोहराई जिसे सुनकर फिर से परियां उस पेड से निचे उतर आयीं, और रमेश से कहने लगीं, तुम फिर से आ गए ? अब क्या हुआ?


परिया बोली तुम बार-बार हमें क्यों परेशान कर रहे हो, रमेश बोला, ”तुमने मुझे दूसरी बार धोखा दिया है , इस बात से आश्चर्यचकित परियां कहने लगीं हमनें तुम्हारे साथ कोई धोखा नहीं किया है, हमने तुम्हे वास्तव में एक जादुई चक्की ही दी थी


लेकिन रमेश  ने उनकी बात नहीं मानी, और परियां कहने लगीं अबकी बार हम तुम्हें एक घडा देंगे, इस घड़े को कहना हे! जादुई घड़े तुम सोना, चाँदी, हीरे मोतियों से भर जाओ, तो यह घडा अपने आप सोना, चाँदी, हीरे मोतियों से भर जाएगा


Saat Pariyon Ki Kahani Hindi


रमेश ने अंतिम बार परियो की बात मानी और अपने घर की तरफ चल दिया और रास्ते में उसी झोंपड़ी में रात बिताई और अबकी बार भी रमेश ने उस आदमी को उस जादुई घड़े के बारे में सबकुछ बता दिया


इस आदमी ने फिर से चालाकी की और पहले की भांति अबकी बार उसका घड़ा बदल दिया, जैसे ही सुबह हुई रमेश उस घड़े को लेकर अपने घर पहुंचा तो उसकी पत्नी उस पर आगबबुला हो गयी, और कहने लगी की मुझे पहले ही पता था तुम काम ही नहीं करना चाहते थे मुझे तो लगता है भूख से ही मरना लिखा है


रमेश ने पत्नी के गुस्से को शांत किया और उसकी विशेषता बताई, तब पत्नी शांत हुई परियों के कहे अनुसार सब किया लेकिन इस बार भी कोई लाभ नहीं हुआ


अब रमेश को बहुत ग़ुस्सा आ गया था वो बिना बोले फिर से जंगल में गया और उसी पेड़ के निचे जाकर परियो को जोर जोर से बोलने लगा अब मै तुम्हे खाऊंगा तुमने मुझे धोखा दिया है यह सब सुनकर उन ७ परियो में से


एक परी ने पेड़ से उतरकर रमेश से पूंछा तुम हमें क्यों खाना चाहते हो तो रमेश ने कहा तुमने मुझे धोखा दिया है तुमने मुझे अपने जादुई उपहार मुझे  देकर पागल बनाया है तो उस परी ने कहा नहीं नहीं अवश्य ही तुम्हारे साथ किसी ने धोखा किया है


तुम मुझे पहले ये बताओ की यहाँ से जाने के बाद तुम कही रुकते थोड़े हो ? तो रमेश ने कहा घर जाते समय मुझे रास्ते में ही रात हो जाती है जिसके कारण मुझे एक झोपड़ी में रुकना पड़ता है


 इस पर परी ने पुरे माजरे को भांप लिया और बोली अबकी बार मै तुम्हे एक रस्सी और डंडा दूंगी तुम बस उसे यह बोलना की जिस किसी ने मेरा सामान चोरी किया है उसकी पिटाई करो मेरे जादुई उपहार मुझे वापस लौटा दे


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इसके बाद रमेश अपने घर को निकल गया और रास्ते में उसी झोपडी में रुका जिसमे पहले दो बार रुका था अबकी बार भी उस आदमीं ने रमेश की खूब खातिरदारी की और रमेश से पूछा की अबकी बार भी कुछ लाये हो, तो रमेश ने कहा हां रमेश ने अपने जेब से उस रस्सी और डंडे को निकल कर कहा परी के बताये अनुसार कहा 'जिस किसी ने मेरा सामान चोरी किया है उसकी पिटाई करो मेरे जादुई उपहार मुझे वापस लौटा दे'


इतना बोलते ही रस्सी और डंडे ने अपना काम शुरू कर दिया रस्सी और डंडे ने उस आदमी को बाँधा और डंडे से जब तक पीटा तब तक उसने उसके जादुई उपहार चोरना कबूल नहीं किया और उसको पिट  पिटकर उसको अधमरा कर दिया  रमेश ने अपने जादुई उपहारों को लेकर घर की ओर प्रस्थान किया और घर पर अपने परिवार को इन उपहारों से चमकृत किया


Saat Pariyon Ki Kahani Hindi Moral: हमें कभी भी किसी के साथ विश्वश्घात नहीं करना चाहिए और जो मनुष्य दूसरों को धोखा देता है उसको ईश्वर अवश्य सजा देता है

Motivational Stories : Bakri Kahani Hindi - बकरी की कहानी

Motivational Stories : Bakri Kahani Hindi

बकरी की कहानी, बकरी की सहेलियां

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Bakri Ki Kahani Kahani

  

Bakri Kahani Hindi: एक समय  की बात है, एक गांव में एक बकरी थी। उस गांव में वह  बहुत खुश थी  वो गांव में सभी से घुली मिली थी। अनेको बकरियां  उससे अपनी सहेली बनाना चाहती थीं।


उसकी गांव में  किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वो गांव के सभी लोगो  से बात कर लेती थी और सभी को अपना दोस्त मानती भी थी।

Bakri Kahani Hindi

अच्छे दिन निकल रहे थे  लेकिन एक दिन  वो बकरी बीमार हो गयी  और बीमारी के   कारण वह धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही थी और उससे चला भी नहीं जा रहा था


इसलिए वह  पूरा दिन घर पर ही रहती थी और साथ ही बकरी के पास कुछ खाने को भी नहीं था   बकरी ने जो खाना पहले से अपने लिए जमा करके रखा था, अब वो भी खत्म हो गया था

Bakri Kahani Hindi

दिन बीतते गए  एक दिन कुछ बकरी सहेलियां उससे मिलने उसके पास गयी   तब वह  बकरी बड़ी खुश हुई। और उससे जिंदगी जीने की कुछ आशा जगी और उसने सोचा की वह अपनी सहेलियों से कुछ दिनों के लिए  अपने लिए  खाना मंगवा लेगी।


लेकिन वे बकरियां उससे मिलने के लिए जैसे ही अंदर आने लगी उसके घर के  बहार कुछ घास था उससे देखकर वो बकरिया  उसके घर के बाहर  ही रुक गईं और उसके आंगन में रखे  पुरे  घास-फूस को खा गयी

Bakri Ki Kahani Kahani

ये देखकर अब इस बकरी को बहुत ग़ुस्सा आया और दुख भी होने लगा और उसके समझ में आ चूका था  कि उसने अपने जीवन बहुत बड़ी  गलती की थी


अब वह  सोचने लगी कि काश मैंने मेरी सहेलियों को संकट की घडी  से पहले ही जाँच लिया होता तो  इस बीमारी में उसकी मदद करने  के लिए कोई तो होता।
Bakri Kahani Hindi

मंगलवार, 26 मई 2020

jadui pariyon ki kahani परियों की कहानी

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Jadui Pariyon Ki Kahani

परियों की कहानी Pariyon Ki Kahaniya in hindi

परियों की कहानी : Pariyon Ki Kahaniya




बहुत समय पहले की बात है. एक खुशहाल राज्य था, जिसमें एक राजा और रानी रहते थे. उनकी कोई संतान नहीं थी. इस कारण वे दोनो बहुत ही दु:खी थे. एक दिन रानी राजमहल के सरोवर के किनारे सूर्य-देवता से संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना कर रही थी. तभी सूर्य की एक चमकीली किरण वहाँ पड़े एक पत्थर पर पड़ी और वो पत्थर एक मेंढक में बदल गया. मेंढक ने भविष्यवाणी की कि एक वर्ष के भीतर रानी एक सुंदर बच्ची को जन्म देगी.

 मेंढक की भविष्यवाणी सच साबित हुई और एक वर्ष के भीतर रानी ने एक बच्ची को जन्म दिया. वह बच्ची बहुत ही सुंदर थी. उसके मुख पर सूर्य की किरणों के समान चमक थी. राजा-रानी छोटी सी राजकुमारी को देखकर ख़ुशी से झूम उठे. उन्होंने उसका नाम रोजामांड रखा.

रोजामांड के जन्म की ख़ुशी में राजमहल में एक बड़े भोज का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य की संपूर्ण प्रजा आमंत्रित थी. सुनहरे वन में रहने वाली परियों को भी उसमें आमंत्रित किया गया था. सुनहरे वन में तेरह परियां रहती थी. लेकिन राजा-रानी से एक गलती हो गई. उन्होंने सिर्फ बारह परियों को ही आमंत्रित किया. तेरहवीं परी को आमंत्रित करना वे भूल गए.

राजभोज बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ. उपस्थित लोगों ने रोजामांड को ढेरों उपहार और आशीर्वाद दिए. जब परियों की बारी आई, तो उन्होंने जादू से न सिर्फ रोजामांड को अनमोल उपहार दिए, बल्कि कई जादुई आशीर्वाद भी दिए. किसी ने बुद्धिमत्ता का, किसी ने सुंदरता का, किसी ने दयालुता का, तो किसी ने धन का आशीर्वाद दिया. यह सिलसिला ग्यारहवी परी तक चलता रहा. अंत में जब बारहवीं परी की बारी आई, तो उसके आशीर्वाद देने के पहले ही तेरहवी परी वहाँ आ गई.

Pariyon Ki Kahaniya


तेरहवी परी राजा-रानी द्वारा उसे राजभोज में आमंत्रित न किये जाने के कारण बहुत क्रोधित थी. अपने इस अपमान का बदला लेने के लिए उसने रोजामांड को ये श्राप दे दिया : “सोलहवे जन्मदिन पर रोजामांड की उंगली में एक सुई चुभेगी और वो मर जाएगी.” इसके बाद बिना एक शब्द कहे वो वहाँ से चली गई.

तेरहवी परी के इस श्राप को सुनकर राजा-रानी दु;खी हो गए. दोनों ने परियों से इसे समाप्त करने का निवेदन किया. लेकिन परियों ने उन्हें बताया कि दिया गया श्राप पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता. ये सुनकर वे और ज्यादा दु:खी हो गये. तब बारहवी परी सामने आई. उसका आशीर्वाद अभी शेष था. उसने राजा से कहा, “ये सत्य है कि तेरहवी परी के श्राप को मैं समाप्त नहीं कर सकती, लेकिन अपने आशीर्वाद से उसे कम अवश्य कर सकती हूँ.”

उसने रोजामांड को आशीर्वाद दिया कि सोलहवे जन्मदिन पर वह सुई चुभने से मरेगी नहीं, बल्कि सौ वर्षों के लिए एक गहरी नींद में सो जाएगी.

राजा ने बारहवी परी को धन्यवाद दिया. लेकिन रानी अभी भी उदास थी. उसने परी से कहा, “मेरी इच्छा है कि मैं रोजामांड का विवाह किसी सुन्दर और वीर राजकुमार के साथ होते हुए देखूं. लेकिन ये संभव नहीं क्योंकि जब सौ वर्षों के बाद रोजामांड अपनी नींद से जागेगी, हम लोग जीवित नहीं रहेंगे.”

रानी की बात सुनकर बारहवी परी ने कहा, “रोजामांड के सोने के कुछ देर बाद राजा-रानी सहित राज्य की सारी प्रजा और पशु-पक्षी भी सो जायेंगे. वे तब तक सोते रहेंगे जब तक रोजामांड सोती रहेगी. रोजामांड की नींद तभी खुलेगी जब एक सुंदर सच्चा प्यार करने वाला राजकुमार उसे चूम लेगा.” इसके बाद सभी परियां वहाँ से चली गई. 


बारहवी परी के आशीर्वाद से राजा-रानी को कुछ राहत अवश्य मिली. लेकिन अब भी वे रोजामांड के भविष्य को लेकर चिंतित थे. उन्होंने सैनिको से कहकर राज्य के सारे चरखे और सुईयां नष्ट करवा दिए, ताकि रोजामांड उस दुष्ट परी के श्राप के प्रभाव से बच सके.

धीरे-धीरे समय बीतने लगा और रोजामांड बड़ी होने लगी. वह सुन्दर, दयालु और बुद्धिमान थी. ठीक वैसे ही, जैसे परियों ने आशीर्वाद दिया था. राज्य के सभी लोग उसे बहुत पसंद करते थे.

Pariyon ki kahani in hindi

वर्ष बीतते-बीतते आखिरकार रोजामांड का सोलहवां जन्मदिन आ गया. उस दिन पूरे राजमहल को सजाया गया और एक बड़े भोज का आयोजन किया गया. शाम तक कोई अनहोनी नहीं हुई. बस रानी के पिता का पत्र आया कि उनकी तबियत बहुत ख़राब है. राजा-रानी अपनी विश्वासपात्र दासी डायना को रोजामांड का ध्यान रखने की हिदायत देकर रानी के पिता को देखने उनके राज्य चले गए.

शाम का समय था. डायना रसोई में काम कर रही थी. डायना को व्यस्त देख रोजामांड राजमहल के बगीचे में आ गई और खेलने लगी. खेलते-खेलते उसकी दृष्टि एक फूल पर बैठी बहुत ही सुंदर सुनहरी तितली पर पड़ी. उस तितली को देखकर वह मोहित हो गई और उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे भागी. तितली उड़ती जा रही थी और रोजामांड उसके पीछे-पीछे भागी चली जा रही थी. अंत में वह तितली एक पुरानी ऊँची मीनार में घुस गई. रोजामांड भी उसके पीछे उस मीनार के अंदर चली गई.

उस मीनार में गोलाकार सीढ़ियाँ बनी हुई थी. तितली का पीछा करते-करते रोजामांड सीढ़ियाँ चढ़ने लगी. चढ़ते-चढ़ते वह मीनार के सबसे ऊपरी हिस्से पर पहुँच गई. वहाँ एक छोटा सा कमरा बना हुआ था. उस कमरे में प्रवेश करने पर उसने देखा कि वहाँ एक बूढ़ी औरत चरखा चला रही है. रोजामांड ने अपने जीवन में कभी चरखा नहीं देखा था. उसने जिज्ञासावश बूढ़ी औरत से पूछा, “ये तुम क्या कर रही हो?”


“मैं चरखे पर सूत कात रही हूँ.” बूढ़ी औरत ने उत्तर दिया. वह बूढ़ी औरत कोई और नहीं, बल्कि वही दुष्ट परी थी. उसने रोजामांड को चरखा चलाने के लिए उकसाया. रोजामांड ने भी उत्सुकतावश उसकी बात मान ली. लेकिन जैसे ही उसने चरखा चलाया, एक नुकीली सुई उसकी उंगली में आ घुसी. वह वहीं गिर पड़ी और गहरी नींद में सो गई.

उधर जब राजा-रानी राजमहल वापस लौटे, तो उन्होंने डायना से रोजामांड के बारे में पूछा. डायना कोई उत्तर नहीं दे पाई. राजा ने सभी सैनिकों को रोजामांड को खोजने का आदेश दे दिया. वे स्वयं भी रोजामांड को खोजने लगे. पूरे महल की छान-बीन की गई, लेकिन रोजामांड कहीं नहीं मिली. महल के बाहर उसे खोजते-खोजते वे लोग उस पुरानी मीनार में पहुँचे. वहाँ पहुँचकर उन्होंने रोजामांड को चरखे के पास सोते हुए पाया. वे समझ गए कि दुष्ट परी का श्राप पूरा हो गया है. रानी दुःख के मारे जोर-जोर से रोने लगी.

राजा ने रानी को समझाया, “कुछ देर में हम सब भी सो जायेंगे. इसलिए अभी रोजामांड को महल लेकर चलते है और इसे उस दिन के लिए तैयार करते है, जब कोई सुंदर राजकुमार इसे नींद से जगाने के लिए आएगा.”

रोजामांड को राजमहल में ले जाया गया. वहाँ उसे तैयार करके एक खूबसूरत बिस्तर पर लिटा दिया गया. वह सोती हुई भी बहुत सुंदर लग रही थी. कुछ देर बाद राजा-रानी, दरबारी, सैनिक, राज्य की सम्पूर्ण प्रजा और पशु-पक्षी जहाँ थे, वहीँ सो गए. उनके सोने के कुछ बाद घनघोर काले बादल राज्य के ऊपर छा गए और पूरा राज्य अँधेरे में डूब गया. राज्य के चारों ओर घनी कंटीली जंगली झाड़ियाँ उग आई और वह राज्य उन झाड़ियों के पीछे छुप गया.

Pariyon Ki Kahaniya


समय बीतता चला गया और कंटीली झाड़ियों के पीछे छुपा राज्य अतीत का हिस्सा बन गया. लेकिन उस सोये हुए राज्य और सुंदर राजकुमारी रोजामांड की कहानियां दूर-दूर के प्रदेशों में प्रसिद्ध थी. कई राजकुमार रोजामांड को पाने की आशा में उस सोये हुए राज्य को ढूँढने जाते. लेकिन उन कंटीली मजबूत झाड़ियों को पार करने में सफल नहीं हो पाते. अपने इसी प्रयास में कई राजकुमार कंटीली झाड़ियों में फंसकर मर गए. धीरे-धीरे राजकुमारों ने मौत के डर से वहाँ जाना छोड़ दिया.


कुछ वर्षों बाद एक दिन इवान नाम के राजकुमार ने जब सोती हुई राजकुमारी की कहानी सुनी, तो वह मन ही मन उससे प्रेम कर बैठा. उसने उस राज्य का पता लगाने का निश्चय किया. वह रोजामांड को नींद से जगाना चाहता था और उस राज्य की खुशहाली फिर से वापस लाना चाहता था.

जब राजकुमार इवान के पिता को यह पता चला, तो उन्होंने वहाँ जाने के खतरे को देखते हुए उसे रोकने का प्रयास किया. लेकिन इवान नहीं मन और उस राज्य को खोजने के लिए निकल पड़ा.

कई दिनों की यात्रा के बाद वह उस राज्य के सामने पहुँचा. उस दिन रोजामांड को सोये हुए सौ वर्ष पूर्ण हो चुके थे. राजकुमार ने राज्य के चारों ओर कंटीली झाड़ियों का जाल देखा. लेकिन वह बहादुर था. उसके तलवार से सारी झाड़ियाँ काट दी और राज्य में घुसने का रास्ता बना लिया.

वह राज्य के अंदर पहुँचा. वहाँ उसने देखा कि जो जहाँ है, वहीँ सोया पड़ा हुआ है. राजमहल के द्वार पर उसने दरबानों को भी सोते हुए पाया. महल के अंदर राजदरबार में पहुँचने पर उसने राजा-रानी और दरबारियों को भी सोते हुए पाया. वह महल में घूमता रहा और अंत में उस कमरे में पहुँचा, जहाँ रोजामांड सोई हुई थी.

Pariyon Ki Kahaniya

जब राजकुमार इवान ने रोजामांड को देखा, तो बस देखता ही रह गया. उसके मन में रोजामांड के बारे में सुनकर जो प्रेम का बीज फूटा था, वह और गहरा हो गया. उसने रोजामांड के पास जाकर उसका हाथ अपने हाथों में लिया और उसे चूम लिया. उसके ऐसा करते ही दुष्ट परी का श्राप टूट गया और रोजामांड नींद से बाहर आ गई. उसने अपनी ऑंखें खोली, तो एक सुंदर राजकुमार को अपने सामने पाया. वह समझ गई कि ये वही सच्चा प्रेम करने वाला राजकुमार है. राजकुमार इवान ने रोजामांड के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया.


दोनो कमरे से बाहर निकलकर राजदरबार पहुँचे. वहाँ उन्होंने देखा कि राजा-रानी और सभी दरबारी नींद से जाग चुके थे. उन्होंने रोजामांड और राजकुमार इवान का स्वागत किया. राजा-रानी बहुत प्रसन्न थे. उन्होंने दो दिन के बाद रोजामांड और राजकुमार इवान के विवाह की घोषणा कर दी.

दूसरे दिन रानी और रोजामांड महल के सरोवर के किनारे सूर्य देवता को धन्यवाद दे रहे थे. तभी अचानक सूर्य से एक आग का गोला निकला और दूर जंगल में बनी एक झोपड़ी पर जा गिरा. उसमें दुष्ट परी रहती थी. झोपड़ी के साथ वह दुष्ट परी भी उसमें जलकर मर गई.

फिर उस आग में से एक सुनहरी तितली निकली और वह रानी और रोजामांड के पास पहुँची. वहाँ वह सरोवर किनारे रखे एक पत्थर पर बैठ गई और वो पत्थर एक मेंढक में बदल गया. रानी ने जब मेंढक को देखा, तो उसे तुरंत पहचान लिया. ये वही मेंढक था, जिसने रोजामांड के जन्म की भविष्यवाणी की थी. उस मेंढक ने रोजामांड को हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद दिया और गायब हो गया.

दो दिनों बाद रोजामांड और राजकुमार इवान का विवाह हो गया और वे ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे.

बाज और किसान : kisan aur baaz ki kahani, motivational stories

बहुत समय पहले की बात है एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे

 राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था

राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो आदमी ने ऐसा ही किया इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था।

ये देख राजा को कुछ अजीब लगा “क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ? राजा ने सवाल किया। ” जी हुजूर इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं।

राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज को भी उसी तरह उड़ना देखना चाहते थे।

अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा फिर क्या था एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता

फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं। उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था।

वह व्यक्ति एक किसान था अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ। उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा , ” मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया मालिक !

 मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता मैंने तो बस वो डाल काट दी जिसपर बैठने का बाज आदि हो चुका था और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा।

दोस्तों, हम सभी ऊँचा उड़ने के लिए ही बने हैं। लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है उसके इतने आदि हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की कुछ बड़ा करने की काबिलियत को भूल जाते हैं

यदि आप भी सालों से किसी ऐसे ही काम में लगे हैं जो आपके सही potential के मुताबिक नहीं है तो एक बार ज़रूर सोचिये कि कहीं आपको भी उस डाल को काटने की ज़रुरत तो नहीं जिसपर आप बैठे हैं.